बरौल–धरतीपारा–खोपा मुख्य मार्ग पर बढ़ा खतरा, जन्माष्टमी सीजन में सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा; हादसों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं
सवाद दाता मनीष यादव|मिसिर पारा बतरा
भटगांव। बरौल–धरतीपारा–खोपा मुख्य मार्ग पर सड़क पर बैठे और खुले में घूम रहे मवेशी राहगीरों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। सड़क के बीचों-बीच गाय-बैलों के बैठे रहने और अचानक वाहनों के सामने आ जाने से वाहन चालकों को हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। जन्माष्टमी के सीजन में सड़कों पर मवेशियों की संख्या बढ़ने से समस्या और गंभीर हो गई है।
यह मार्ग आसपास के कई गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। यहां प्रतिदिन ग्रामीणों, किसानों, स्कूली बच्चों, कर्मचारियों और दोपहिया-चारपहिया वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में सड़क पर मवेशियों के झुंड के बैठे रहने से यातायात प्रभावित होने के साथ सड़क सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सड़क के बीच बैठ जाते हैं मवेशी
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार सुबह से देर रात तक मार्ग के अलग-अलग हिस्सों में गाय-बैल सड़क पर बैठे या घूमते नजर आते हैं। कई बार मवेशियों का पूरा झुंड सड़क के बीच बैठ जाता है। उन्हें बचाने के लिए वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने या वाहन की दिशा बदलने पर मजबूर होना पड़ता है।
दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति अधिक जोखिमपूर्ण है। अचानक सामने मवेशी आने पर बाइक को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। पीछे से तेज गति से वाहन आने की स्थिति में अचानक ब्रेक लगाने या दिशा बदलने से दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि मवेशियों से टकराने से बचने के प्रयास में कई बार वाहन चालक अनियंत्रित होकर गिर चुके हैं। इससे लोगों के घायल होने और वाहनों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।
बारिश और रात में बढ़ जाता है खतरा
बरसात के मौसम और रात के समय सड़क पर बैठे मवेशियों से दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बारिश के दौरान दृश्यता कम होने और रात में पर्याप्त रोशनी नहीं होने से काले या गहरे रंग के मवेशी दूर से दिखाई नहीं देते। ऐसे में वाहन चालक को मवेशी काफी नजदीक पहुंचने के बाद दिखाई देता है।
तेज गति से चल रहे वाहनों के सामने अचानक मवेशी आने पर चालक के पास वाहन रोकने या सुरक्षित दिशा में मोड़ने के लिए पर्याप्त समय नहीं रहता। विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए ऐसी स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
पशुपालकों की लापरवाही भी जिम्मेदार
ग्रामीणों के अनुसार मवेशियों के सड़क पर पहुंचने का एक प्रमुख कारण पशुपालकों द्वारा उन्हें खुले में छोड़ देना है। दिनभर खेतों और बस्तियों के आसपास घूमने के बाद कई मवेशी शाम होते-होते मुख्य सड़क पर पहुंच जाते हैं और रात में सड़क पर ही बैठ जाते हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि खुले में मवेशी छोड़ने वाले पशुपालकों को चिन्हित कर उन्हें पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए समझाइश दी जाए। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई भी की जाए।
हादसों के बावजूद स्थायी व्यवस्था नहीं
स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क पर मवेशियों के कारण पहले भी वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। कई बार मवेशियों को बचाने के प्रयास में वाहन अनियंत्रित होने की घटनाएं सामने आई हैं। इसके बावजूद समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ानी चाहिए। जिन स्थानों पर मवेशी नियमित रूप से सड़क पर बैठते हैं, वहां विशेष निगरानी और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
गौठानों और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और संबंधित ग्राम पंचायतों से सड़क पर घूम रहे मवेशियों को हटाने के लिए तत्काल अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क पर पाए जाने वाले मवेशियों को सुरक्षित स्थानों और गौठानों में पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।
इसके साथ ही पशुपालकों को मवेशियों को खुले में छोड़ने से रोकने के लिए गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने की मांग भी की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल मवेशियों को सड़क से हटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें दोबारा सड़क पर आने से रोकने के लिए भी ठोस व्यवस्था जरूरी है।
मुख्य संपर्क मार्ग होने से बढ़ी चिंता
बरौल–धरतीपारा–खोपा मार्ग आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। दिनभर इस मार्ग पर लोगों और वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। दिन के समय वाहन चालक किसी तरह मवेशियों को देखकर निकल जाते हैं, लेकिन रात और बारिश के दौरान स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
समय रहते ठोस कार्रवाई की जरूरत
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से किसी बड़े हादसे का इंतजार किए बिना तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है। सड़क पर घूमने और बैठने वाले मवेशियों को हटाने के लिए नियमित अभियान चलाने, संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने तथा खुले में मवेशी छोड़ने वाले पशुपालकों को चिन्हित करने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बैठे मवेशी केवल यातायात में बाधा नहीं, बल्कि राहगीरों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। प्रशासन, पंचायत और पशुपालक मिलकर समय रहते प्रभावी कदम उठाएं तो दुर्घटनाओं की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लोगों ने बरौल–धरतीपारा–खोपा मार्ग को मवेशियों के जमावड़े से मुक्त कर सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने की मांग की है।

