CG News 9 महीने जेल में रहा प्रधान पाठक, शिक्षा विभाग को भनक तक नहीं! VSK ऐप और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर उठे सवाल
उदयपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। उदयपुर विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला पेंडरखी में पदस्थ प्रधान पाठक विजय कुमार यादव हत्या के प्रयास के मामले में करीब 9 महीने से अधिक समय तक जेल में निरुद्ध रहे, लेकिन इस दौरान शिक्षा विभाग को इसकी जानकारी नहीं होने का दावा किया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली और शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
अदालत ने सुनाई थी 5 साल की सजा
मिली जानकारी के अनुसार, प्रधान पाठक विजय कुमार यादव को हत्या के प्रयास के मामले में निचली अदालत ने 3 जनवरी 2026 को दोषी ठहराते हुए 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद वे केंद्रीय जेल में निरुद्ध रहे और 9 अक्टूबर 2026 तक जेल में थे।
हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय तक स्कूल के संस्था प्रमुख की अनुपस्थिति के बावजूद विभागीय स्तर पर इसकी जानकारी सामने नहीं आई।
CAC से लेकर DEO तक की निगरानी पर सवाल
इस मामले ने शिक्षा विभाग की पूरी मॉनिटरिंग व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया है। स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संकुल समन्वयक (CAC), संकुल प्राचार्य, विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सहित संबंधित अधिकारियों की होती है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रधान पाठक की लगातार अनुपस्थिति पर किसी अधिकारी ने समय रहते ध्यान क्यों नहीं दिया?
VSK ऐप की ऑनलाइन मॉनिटरिंग पर भी उठे सवाल
शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों की उपस्थिति और स्कूलों की निगरानी के लिए विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप का उपयोग किया जाता है। डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू होने के बावजूद यदि कोई शिक्षक कई महीनों तक स्कूल में अनुपस्थित रहता है, तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची?
इस घटना ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने और उसकी नियमित समीक्षा की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
तत्कालीन BEO के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव
जानकारी के अनुसार, इस मामले में कलेक्टर की ओर से तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी के खिलाफ तथ्यों को छिपाने और लापरवाही के आरोप में शासन को कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा गया है।
वहीं, वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी ने संबंधित थाना प्रभारी को नोटिस जारी कर पूछा है कि कर्मचारी के जेल में निरुद्ध रहने की सूचना शिक्षा विभाग को क्यों नहीं दी गई।
आखिर किसकी थी जिम्मेदारी?
इस पूरे मामले में कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आ रहे हैं:
प्रधान पाठक की लगातार अनुपस्थिति की जानकारी विभाग को क्यों नहीं मिली?
स्कूल की नियमित मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की?
VSK ऐप में अनुपस्थिति की स्थिति की समीक्षा क्यों नहीं हुई?
तत्कालीन BEO की भूमिका और जिम्मेदारी क्या थी?
विभागीय स्तर पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
अब विभागीय जांच पर टिकी नजरें
करीब 9 महीने तक प्रधान पाठक के जेल में रहने और विभाग को इसकी जानकारी नहीं होने के दावे ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि शासन स्तर पर प्रस्तावित कार्रवाई और विभागीय जांच में किन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होती है तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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