इंटरनेट संकट का खतरा मंडराया: मध्य पूर्व तनाव से वैश्विक कनेक्टिविटी पर असर की आशंका
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने अब सिर्फ ऊर्जा आपूर्ति ही नहीं, बल्कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के कारण दुनिया की महत्वपूर्ण समुद्री इंटरनेट केबलों पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे वैश्विक डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य दो ऐसे रणनीतिक समुद्री मार्ग हैं, जहां से न केवल तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है, बल्कि समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबलों का विशाल नेटवर्क भी मौजूद है। इन केबलों के जरिए ही दुनिया भर में इंटरनेट डेटा का आदान-प्रदान होता है।
रिपोर्ट के अनुसार, हॉर्मुज क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों और कथित सुरक्षा खतरों के चलते शिपिंग और बीमा कंपनियों में चिंता बढ़ी है। वहीं, हुथी समूह द्वारा लाल सागर में जहाजों पर हमलों की घटनाओं ने हालात को और जटिल बना दिया है। ये दोनों क्षेत्र समुद्र तल पर फैली उन केबलों के ऊपर स्थित हैं, जिनसे यूरोप, एशिया और अफ्रीका जुड़े हुए हैं।
जानकारी के मुताबिक, लाल सागर से करीब 17 और हॉर्मुज से कई प्रमुख केबल गुजरती हैं, जिनमें एएई-1, फाल्कन, गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल और टाटा-टीजीएन गल्फ शामिल हैं। ये केबल भारत सहित कई देशों के अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक की रीढ़ मानी जाती हैं।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि इन समुद्री केबलों को किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचता है, तो इसका असर केवल इंटरनेट स्पीड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, क्लाउड सेवाएं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्लेटफॉर्म भी ठप हो सकते हैं।
दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियां जैसे Amazon, Microsoft और Google ने संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे देशों में बड़े डेटा सेंटर स्थापित किए हैं, जो इन्हीं केबलों पर निर्भर हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य का सबसे संकरा हिस्सा अपेक्षाकृत उथला है, जिससे इन केबलों को नुकसान पहुंचाना आसान हो सकता है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि अगर हालात और बिगड़े, तो वैश्विक इंटरनेट व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।
