श्री रामलला दर्शन योजना आस्था, संस्कृति और सामाजिक चेतना का संगम जिले के 1632 रामभक्तों को अयोध्या में प्रभु श्री रामलला के दर्शन का सौभाग्य मिला
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी श्री रामलला दर्शन योजना प्रदेशवासियों के लिए आस्था और सांस्कृतिक चेतना का एक अनूठा संगम बन चुकी है। इस योजना का उद्देश्य केवल अयोध्या में भगवान श्रीरामलला के दर्शन कराना ही नहीं, बल्कि समाज में सामूहिकता, सांस्कृतिक जुड़ाव और सामाजिक चेतना को सुदृढ़ करना भी है।
इस योजना की शुरुआत 5 मार्च 2024 को रायपुर से हुई थी, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्वयं पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। तब से लेकर अब तक हजारों श्रद्धालु इस योजना का लाभ ले चुके हैं और भगवान श्रीरामलला के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य मान रहे हैं।
जशपुर से 1632 रामभक्तों ने पाया दर्शन का सौभाग्य
योजना के अंतर्गत जशपुर जिले के 1632 रामभक्त अब तक अयोध्या जाकर भगवान श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त कर चुके हैं। इनमें विभिन्न पंचायत और नगर क्षेत्रों से श्रद्धालुओं ने यात्रा की –
जनपद पंचायत जशपुर से 134
जनपद पंचायत मनोरा से 95
जनपद पंचायत बगीचा से 168
नगर पालिका जशपुर से 83
नगर पंचायत बगीचा से 58
जनपद पंचायत कुनकुरी से 172
जनपद पंचायत दुलदुला से 110
जनपद पंचायत फरसाबहार से 179
नगर पंचायत कुनकुरी से 109
जनपद पंचायत पत्थलगांव से 220
जनपद पंचायत कांसाबेल से 165
नगर पालिका पत्थलगांव से 82
नगर पंचायत कोतबा से 57
इस तरह जशपुर जिले के हर क्षेत्र से श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन का लाभ उठाया।
श्रद्धालुओं के लिए संपूर्ण सुविधा
योजना के तहत श्रद्धालुओं को पूरा यात्रा पैकेज उपलब्ध कराया जाता है। इसमें छत्तीसगढ़ से अयोध्या तक की यात्रा, वहां ठहरने की व्यवस्था, मंदिर दर्शन, नाश्ता और भोजन शामिल है। यह सुविधा न केवल आर्थिक दृष्टि से सहायक है बल्कि श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित और सुखद यात्रा का अनुभव भी कराती है।
छत्तीसगढ़ और राम का ननिहाल संबंध
छत्तीसगढ़ को भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। यहां के लोग उन्हें स्नेहपूर्वक भांचा राम के नाम से भी पुकारते हैं। भगवान श्रीराम से जुड़ी यह सांस्कृतिक विरासत प्रदेश की हर सांस और कण-कण में बसती है। यही कारण है कि अयोध्या पहुंचकर रामभक्तों की आंखों में आस्था और श्रद्धा के आंसू छलक पड़ते हैं।
आस्था से सामाजिक चेतना तक
रामलला दर्शन योजना केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और राम के आदर्शों को समाज में पुनः स्थापित करने की पहल भी है। यात्रा के दौरान गूंजते रामभक्ति भजन, “जय श्रीराम” के उद्घोष और श्रद्धालुओं के चेहरों पर झलकती खुशी इस योजना को एक सांस्कृतिक उत्सव का रूप देती है।
मुख्यमंत्री की पहल का परिणाम
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शिता और लोककल्याणकारी सोच इस योजना में स्पष्ट झलकती है। उनके नेतृत्व में शुरू की गई यह योजना न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था की पूर्ति का माध्यम बनी है, बल्कि समाज में एकता, संस्कृति और आध्यात्मिकता को भी मजबूती प्रदान कर रही है।