CG @गणतंत्र दिवस पर आंगनबाड़ी में नहीं फहराया तिरंगा, महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
कोरिया। जिले के ग्राम पंचायत भांडी अंतर्गत साहू पारा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा झंडा नहीं फहराया जाना प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण बन गया है। राष्ट्रीय पर्व जैसे महत्वपूर्ण दिन पर भी झंडारोहण न होना ग्रामीणों में आक्रोश और निराशा का कारण बना।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार सुबह लगभग 7:30 बजे से ही बच्चे और ग्रामीण आंगनबाड़ी केंद्र में एकत्रित हो गए थे। बच्चे पूरे उत्साह के साथ तिरंगा फहराने पहुंचे थे, लेकिन 11:30 बजे तक भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केंद्र में उपस्थित नहीं हुई। लंबे समय तक इंतजार के बाद बच्चे मायूस होकर घर लौट गए। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है, बल्कि संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के खिलाफ पूर्व में भी कई शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आंगनबाड़ी केंद्र समय पर नहीं खुलता, बच्चों को नियमित पोषण आहार नहीं मिलता और कार्यकर्ता की लगातार अनुपस्थिति आम बात हो गई है। इसके बावजूद महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। यही कारण है कि राष्ट्रीय पर्व पर भी केंद्र में झंडारोहण नहीं हो सका, जो सीधे तौर पर देश के सम्मान से जुड़ा विषय है।
अन्य जिलों में यदि किसी शासकीय या अर्धशासकीय संस्था में झंडारोहण नहीं होता, तो संबंधित जिम्मेदारों पर तत्काल कार्रवाई की जाती है। ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या कोरिया जिले में भी जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग इस मामले में सख्त कदम उठाएगा या फिर इसे भी अन्य शिकायतों की तरह नजरअंदाज कर दिया जाएगा।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि महिला एवं बाल विकास मंत्री का मायका कोरिया जिले में है और वर्तमान में उनका निवास पड़ोसी जिला सूरजपुर में है। ऐसे में जब पड़ोसी जिले से जुड़े क्षेत्र में ही आंगनबाड़ी केंद्रों की यह स्थिति है, तो दूरस्थ क्षेत्रों की स्थिति का अनुमान लगाना कठिन नहीं है। यह घटना विभाग की निगरानी व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस संवेदनशील मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या साहू पारा आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता के विरुद्ध ठोस कार्रवाई की जाती है या फिर राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा यह मामला भी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा।
